प्रेमिका और पत्नी: क्यों बदल जाता है रिश्ता?

August 15,2025Admin

यह बात अक्सर मजाक और हकीकत दोनों में कही जाती है कि प्रेमिका तो मीठी होती है, लेकिन पत्नी थोड़ी "खड़ूस" क्यों बन जाती है?

इस बात को गहराई से समझाते हैं। आइए, इस विचार को थोड़ा और विस्तार से देखते हैं:

 

प्रेमिका: सपनों की दुनिया

 

जब कोई पुरुष अपनी प्रेमिका के साथ होता है, तो वह उसे अपनी सबसे अच्छी छवि दिखाता है। यह एक ऐसी दुनिया होती है, जहाँ सब कुछ नया और रोमांचक होता है।

  • जुनून और उत्साह: याद कीजिए, जब प्रेमिका के साथ घूमने जाना होता था, तो चाहे बारिश हो या धूप, एक उधार की बाइक और कुछ पैसे से भी लॉन्ग ड्राइव का प्लान बन जाता था। उसे बस खुश करना ही एकमात्र मकसद होता था।

  • रोमांटिक बहाने: प्रेमिका को मनाने के लिए पुरुष झुक जाते थे, घंटों फोन पर बात करते थे, और हर बात पर माफी मांग लेते थे। क्योंकि तब यह रिश्ता सिर्फ दो लोगों का था, जिसमें प्यार और रोमांस ही सबसे बड़ी प्राथमिकता थी।

  • छोटी-छोटी बातों पर तारीफ: प्रेमिका के लिए तो हर छोटी-बड़ी बात खास होती थी। उसकी ड्रेस, उसकी हंसी, उसकी पसंद - हर बात की तारीफ होती थी। क्योंकि यह रिश्ता अभी 'सफलता' की कसौटी पर नहीं था, बल्कि 'प्रशंसा' के सहारे चल रहा था।

 

पत्नी: हकीकत की दुनिया

 

शादी के बाद, यह रिश्ता एक नए मोड़ पर आ जाता है। यह सिर्फ दो लोगों का नहीं, बल्कि दो परिवारों का रिश्ता बन जाता है, जहाँ जिम्मेदारियां और वास्तविकताएं सामने आ जाती हैं।

  • जिम्मेदारियों का बोझ: जो पुरुष प्रेमिका को बारिश में लॉन्ग ड्राइव पर ले जाते थे, वही पत्नी से बारिश में गरमा गरम चाय और पकौड़ी बनाने की उम्मीद करते हैं। यह बदलाव इसलिए आता है क्योंकि अब वह उसे अपनी प्रेमिका नहीं, बल्कि अपने घर की "पार्टनर" समझने लगते हैं, जिससे अपेक्षाएं बदल जाती हैं।

  • अहंकार और 'ना' की लड़ाई: जहाँ प्रेमिका की 'ना' पर पुरुष गिड़गिड़ाने लगते थे, वहीं पत्नी की 'ना' पर उनका अहंकार आहत हो जाता है। वे इसे अपने लिए अपमान समझते हैं, जबकि यह सिर्फ दो लोगों के बीच का एक सामान्य मतभेद हो सकता है।

  • विशेष से सामान्य की ओर: जो प्रेमी प्रेमिका को हर खास जगह पर ले जाते थे, वही पति पत्नी को सिर्फ पारिवारिक समारोहों - मुंडन, जनेऊ या बीमार रिश्तेदार की देखभाल के लिए ले जाना ही याद रखते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि अब उनका रिश्ता सिर्फ 'रोमांस' पर आधारित नहीं है, बल्कि 'परिवार' और 'कर्तव्य' पर आधारित हो गया है।

  • केयर बनाम इन्क्वायरी: जहाँ प्रेमिका के दर्जनों फोन कॉल्स 'केयर' लगते थे, वहीं पत्नी के दो फोन कॉल्स 'इन्क्वायरी' लगने लगते हैं। पुरुष यह भूल जाते हैं कि पत्नी का फोन करना उसकी चिंता का प्रतीक है, न कि उसकी जासूसी का।

  • अकेले की जिम्मेदारी: सबसे बड़ी बात, पुरुष अपने परिवार की जिम्मेदारियों से दूर रहते हैं और पत्नी से उम्मीद करते हैं कि वह उनके पूरे परिवार की सेवा करे। वे यह भूल जाते हैं कि पत्नी भी एक इंसान है, जिसकी अपनी सीमाएं और जरूरतें हैं।

निष्कर्ष:

सच तो यह है कि पत्नी कोई अलग प्राणी नहीं होती, वह वही लड़की होती है जो कभी आपकी प्रेमिका थी। यह पुरुषों का व्यवहार ही है जो उसे बदलता है। पत्नी हर स्थिति में साथ देती है, चाहे सुख हो या दुख, बीमारी हो या तंगी। उसकी सहनशीलता और समर्पण की कोई सीमा नहीं होती।

समस्या यह नहीं है कि पत्नी "खड़ूस" हो जाती है, बल्कि यह है कि पुरुष उसके योगदान की कद्र करना भूल जाते हैं। यदि पुरुष अपनी पत्नी को भी वही सम्मान, प्यार और तारीफ दें जो वे अपनी प्रेमिका को देते थे, तो वह आज भी उतनी ही मीठी बनी रहेगी।

प्रेम और सम्मान का यह छोटा सा फर्क ही है, जो प्रेमिका को 'मीठा' और पत्नी को 'कड़वा' बना देता है।

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